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"बेटी"बचाओ "बेटी पढाओ"

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एक युवक ने विवाह के दो साल बाद परदेस जाकर व्यापार करने की इच्छा पिता से कही । पिता ने स्वीकृति दी तो वह अपनी गर्भवती पत्नी को माँ-बाप के जिम्मे छोड़कर व्यापार करने चला गया । परदेश में मेहनत से बहुत धन कमाया और वह धनी सेठ बन गया । सत्रह वर्ष धन कमाने में बीत गए तो सन्तुष्टि हुई और वापस घर लौटने की इच्छा हुई । पत्नी को पत्र लिखकर आने की सूचना दी और जहाज में बैठ गया । उसे जहाज में एक व्यक्ति मिला जो दुखी मन से बैठा था । सेठ ने उसकी उदासी का कारण पूछा तो उसने बताया कि इस देश में ज्ञान की कोई कद्र नही है । मैं यहाँ ज्ञान के सूत्र बेचने आया था पर कोई लेने को तैयार नहीं है । सेठ ने सोचा 'इस देश में मैने बहुत धन कमाया है, और यह मेरी कर्मभूमि है, इसका मान रखना चाहिए !' उसने ज्ञान के सूत्र खरीदने की इच्छा जताई । उस व्यक्ति ने कहा- मेरे हर ज्ञान सूत्र की कीमत 500 स्वर्ण मुद्राएं है । सेठ को सौदा तो महंगा लग रहा था.. लेकिन कर्मभूमि का मान रखने के लिए 500 स्वर्ण मुद्राएं दे दी । व्यक्ति ने ज्ञान का पहला सूत्र दिया- कोई भी कार्य करने से पहले दो मिनट रूककर सोच लेना । सेठ ने सूत्र अपन...

बरसठी से जौनपुर

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हमारा जौनपुर बरसठी से जौनपुर _____________________ अगर आपको कभी संदेह हो की मानव उत्पत्ति बंदरो से नही हुई है तो एक बार मेरे गाँव सरसरा स्थित बरसठी स्टेशन आ जाइये । रोजाना मड़ियाहूं जौनपुर जाने वाले लड़के स्टेशन से लेकर ट्रैन में ऐसा उधम मचाते है जैसे की हनुमान जी लंका दहन पर निकले हो और कूद कूद कर अंटारिकाओ और परकोटे को जला रहे हो। क्षेत्र के लड़के जाते तो इलाहाबाद भी है लेकिन उनपर उम्मीदों का बोझ थोड़ा ज्यादा होता है इसलिए बोझ से दबे होने के कारण वो बन्दर से इंसान में परिवर्तित होने की प्रक्रिया में होते है इसलिए उनकी उछल कूद कम होती है। बीए बीएससी एमए एमएससी के बाद अब आईटीआई के छात्र रोजाना चढते है इलाहबाद जौनपुर पैसेंजर एजे(आओ झेलो) या इंटरसिटी ट्रैन पर। ट्रेन आने की जब आहट तक नही होती तब भी ये लड़के रेलवे पटरी पर कान रख कर तरंगों के माध्यम से ट्रेन की दूरी का अंदाजा लगाते है। जैसे की 'तरंगों की चाल ठोस में सबसे ज्यादा होती है' वाले टॉपिक को कुछ ज्यादा ही सीरियसली ले लिए हो। जब तक ट्रेन ना आ जाये तब तक हर कोई अपने छठी इंद्री से ट्रेन के सही लोकेशन की भविष्यवाणी करता ...